The School Weekly 28th September 2020

Virtual School Functioning
Academics
Half Yearly Exams completed in the Primary Section. They have started their Art Integrated Subject Enrichment Projects on Google Classroom

Half Yearly Exams for Class VI-XII got over on 26th September’20.
Students were trained with Use of Capacitors and Slide buttons on Tinkercad.com on 26th, September (3rd Session of “Learn Electronics at home” module.
 
Ronak Devda from Class XI - Commerce is Hosting a Photography Event On Instagram 

My Good School Activities
Sports Quiz, GK Quiz, Personal Hygiene & Health Awareness Projects, live Tinkering sessions are the part of My Good School Activities.

Professional Development
E-Learning for Educators:
4 Educators are getting Trained for Plezmo App development Course.
1 Educator is getting trained for Augmented Reality, Completed with Module 1. (4 Module Course)
 Educators had their II Session of PLP Cycle # World Ready on Saturday,26th September 2020 from 10.00- 11.30 am on Chapter- 2 Beating the Odds from Anupam Sibal's book' Is Your Child Ready To Face The World'.

Posts from our Educators
 लिखना 
लिखने की कला हर किसी में नहीं होती हैं और जिसमें लिखने का हुनर है दिमाग में उत्पन्न  विचारों कल्पनाओं को कागज पर  लिखने की कला है जब हम लिखने बैठते हैं तो हर पहलू के बारे में सोच कर उसे पूर्ण करना पड़ता हैं | लेखन शतरंज के खेल की तरह है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आखिरी चाल सबसे पहले सूची जाती हैं | हमारे पास विचार हैं नहीं तो हम उन्हें लिखना चाहते हैं अगर हमने लिख रहे हैं तो उसके बारे में जानकारी पता करना पड़ती ही अच्छा लिखने के लिए हमारी जानकारी बिल्कुल सही होनी चाहिए बिना जानकारी या गलत लिखना हमें हंसी के पात्र बना देता है अत्यधिक विचारणीय लोग अकेले रहना पसंद करते हैं  अक्षर वो खुद से ही बातचीत करते रहते हैं ,सोचते रहते हैं | हमें बेहतर कार्य करने में मदद मिलती हैं जिससे हमारी सोचने,समझने और लिखने  का नजरिया बढ़ता है | लिखना एक माध्यम है जिसके द्वारा हमें अपने विचारों को उस व्यक्ति के पास पहुंच जाते हैं जो हमारे समक्ष नहीं होता है हमें अपने अनुभव को संजो कर रखना चाहिए हमें दूसरे लोगों से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए जिससे हमारे लिखने की क्षमता का विकास होता है हमें परिस्थितियों से निकलने के लिए यह समझना होगा कि बातचीत भी लेखन हैं | शुरुआती लिखने की कला का विकसित करने के क्रम में बहुत सारे बहुत सारे तरीके ऐसे हैं | जिससे वर्णमाला को जोड़ सकते हैं उससे संबंधित शब्दों को खोजने के लिए प्रेरित करता है उसे लिखने की बुनियादी कला में पारंगत हो जाते हैं | हमें व्यक्तियों  को लिखने के  बारे में प्रोत्साहित करना चाहिए हमें धीरे-धीरे अलग-अलग श्रोताओं के लिए अपने पसंद के शब्दों का चयन और उसका प्रयोग करना सीखना चाहिए  
जफ्फर खां
 
Positive Thinking 
People with positive thinking mentality scrutinize the brilliant aspect of life and anticipate happiness, health and success. Such folks, square measure assured that they'll overcome any obstacle and problem they could face.
Positive thinking isn't a thought that everybody believes and follows. Some, think about it as nonsense and scoff at those that believe it. However, there's a growing range of individuals, who settle for the ability of positive thinking as a reality and believe its effectiveness.
This subject is gaining quality, as proved by the various books, lectures and courses regarding it. To take advantage of the ability of positive thinking in your life, you wish to try and do over simply remember of its existence or believe it. you wish to adopt the perspective of positive thinking in everything you are doing.
With a positive perspective, we tend to expertise pleasant and happy feelings. This brings brightness to the eyes, additional energy, and happiness. Our whole being broadcasts sensible can, happiness and success. Even our health is affected by an exceedingly helpful means. we tend to walk tall, our voice is additional powerful, and our visual communication shows means we tend to feel.
Jitendra Suthar

नारी शिक्षा 
एक  सभ्य  समाज  का  निर्माण  देश  के शिक्षित   नागरिकों   द्वारा होता  हैं। और  इसमें  नारी का  अहम  हिस्सा हैं।  परिवार में मुख्य बिंदु  नारी  होती  है , यदि  एक नारी  शिक्षित  होती  हैं  तो  वह  पूरे परिवार  को  शिक्षित  कर सकती  हैं।  एक  बच्चे की  पहली  अध्यापिका  या गुरु  उसकी मां होती है , और  विद्यालय  उसका  घर  होता  है जो शिक्षा एक बच्चे को  उसकी माँ दे  सकती  हैं वो  उसे दुनिया  के  किसी  भी  विद्यालय  में प्राप्त नहीं हो सकते हैं। नारी का कर्तव्य  बच्चों  के पालन-पोषण करने  के अतिरिक्त  अपने  घर -परिवार  की  व्यवस्था  और  संचालन  करना  भी  होता  हैं। एक शिक्षित  और  विकसित  नारी  अपनी  आय  ,परिस्थिति  और  घर  के  सभी  सदस्यों  की  आवश्यकता  आदि  का  ध्यान  रखकर  उचित  व्यवस्था  और  संचालन  कर  सकती हैं। इसलिए  आज  के समाज  और  देश  के  लिए  विकास के लिए  नारी का  शिक्षित  होना  बहुत  आवश्यक  हैं।
Kusum Dangi

हमारे प्राचीन ग्रंथ 
वर्तमान में हम आधुनिक हो चले हैं, समय के साथ बदलना ठीक भी है। जो समय के साथ चलता है, वह सफल रहता है। रहने का ढंग बदल गया, खानपान बदल गया, हमारे तौर-तरीके और रीति-रिवाज भी बदल गए। बदलाव का यह दौर ऐसा चला कि हमने बहुत कुछ बदल दिया। कुछ जगह बदलाव नहीं होना चाहिए था, वहाँ भी बदलाव हो गया। समय के साथ बदलने का तात्पर्य है, हम भी जमाने की दौड़ में साथ रहें किंतु इसका अर्थ यह नहीं कि हमारा जिससे अस्तित्व है, वही समाप्त कर दिया जाए। 
हमारे प्राचीन ग्रंथों में एक से बढ़कर एक मूल्यों की बात कही गई है। आज इन्हीं मूल्यों का विघटन होते हुए देख रहे हैं। मूल्यों के विकास की चर्चाएँ की जाती है, छात्रों में मूल्य कैसे जागृत हो इस पर मंथन किया जाता है। साथ ही कई स्थानों पर इस पर टिप्पणियाँ भी की जाती है- पहले ऐसा होता था या वैसा होता था, अब नहीं होता। इन सबके लिए जिम्मेदार भी हम ही हैं। अपने ग्रंथों में दिए गए तथ्यों को पढ़ते नहीं या उन्हें स्वीकार करते नहीं क्योंकि हम बदल चुके हैं। 
 हमारे ग्रंथों ने हमें बहुत कुछ दिया है, इनमें जीवन मूल्य भी सम्मिलित है। कई बातों को पाप और पुण्य की अवधारणा से जोड़ दिया गया, जिससे मन में थोड़ा सा भय रहे और मनुष्य प्रकृति के साथ खिलवाड़ न करें या जीवन मूल्यों का त्याग ना करें। जब तक इन प्राचीन ग्रंथों को लोग श्रद्धा पूर्वक पढ़ते थे, उन पर मनन करते थे तब तक कभी सांप्रदायिक दंगों का नामोनिशान नहीं था। प्रकृति से खिलवाड़ नहीं होता था। यही कारण था कि उस समय कभी कहीं अनावृष्टि या अतिवृष्टि नहीं होती थी।
 इन प्राचीन ग्रंथों में धार्मिक ग्रंथ भी है, जिन्हें कोई पढ़ता नहीं है परंतु इनके लिए आपस में लड़ जाने के लिए तैयार रहते हैं। समाज को सही दिशा देने के लिए मनीषियों ने इन ग्रंथों की रचना की होगी, इनकी रचना में न जाने कितना समय तथा कितनी श्रम लगा होगा। हमारा काम तो सिर्फ इन्हें पढ़ना और अनुकूल वातावरण तैयार करना है। कुछ ग्रंथ तो हम पढ़ भी नहीं सकते क्योंकि वे जिस भाषा में लिखे गए हैं, वह हमारी समझ से दूर होती जा रही है। यह भी बदलाव का ही परिणाम है।
सीखो सब पर अपनी चीजों को, अपने वैभव को मत भूलो। आज यदि विश्व के साथ तालमेल रखना है तो हमें बहुत कुछ नया भी सीखना पड़ेगा। तभी हम विश्व में अपने देश को स्थान दिला पाएँगे परंतु ऐसा नहीं हो कि अपनी सभ्यता से मुँह मोड़ लें। अपने साहित्य पर हमें गर्व होना चाहिए, साथ ही  इनका अध्ययन भी करते रहना चाहिए।  कई सारे जीवन उपयोगी तथ्य हम अध्ययन मात्र से ही सीख जाएँगे।
Krishan Gopal
 
World Rivers Day 
It is not an unknown fact that the most important thing in our life is water. It is fuel for all the living things which reside on this planet, Earth. Denying the importance of rivers would be wrong, as they are vital for the irrigation of crops and the existence of life on Earth. Not only rivers support life to the organism inside it, but also to the species that reside outside it. Plants will fail to grow and die if they do not get enough water. The human body will not be able to function properly if there is no water for them to drink. We get all the water we have from rivers, as they are the only source of water.
Not only for drinking, but water is also one of the primary ingredients for cooking food. We get this water from rivers. The importance of rivers is much than we recognize in our lives, ranging from the drinking water that we have to the electricity-producing plants which power all the appliances we have in our lives. It would not be wrong to say that life will only continue to exist if there is a river flowing on this planet.
Nowadays rivers in virtually every country face an array of threats due to the growing pollution. So, to highlight the values of rivers in our life World Rivers Day is celebrated on the fourth Saturday of the month of September. It strives to increase public awareness and encourages the improved stewardship of all rivers around the world.
On this day many enhancement projects are carried out to clean the rivers. People do surfing, canoeing, water activities etc. to celebrate this day. I would like to quote that 'If you save water, water will save you' so save rivers which is an integral part of our life.
References: impoff.com & worldriversday.com
Bharti Rao

मेहनत करने से मिलती है मंजिल 
*दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा*
हिन्दी जगत की मशहूर फिल्म मदर इण्डिया के गीत के मर्म को अगर गहराई से जानने की कोशिश करे तो हमें यह मालूम पड़ेगा कि जिन्दगी इम्तिहान का नाम है, संघर्ष का नाम है। ये इम्तिहान इंसान की जिंदगी में मां की गोद से शुरू होकर कब्र की गोद तक जारी रहते हैं। इंसान को हर दिन, हर पल किसी न किसी तरह के इम्तिहान या परीक्षा से गुजरना ही पड़ता है। कुछ लोग इन इम्तिहानों को हंसते-हंसते पार करते है और कुछ घुट-घुट कर इनका सामना करते हैं।
अक्सर देखने में आया हैं कि जिंदगी के इन इम्तिहानों में केवल दो ही तरह के लोग असफल होते हैं एक वे जो सोचते हैं पर करते कुछ नहीं और दूसरे वे जो करते तो बहुत है मगर सोचते कुछ नहीं। बिना सोचे विचारे किया काम कभी सफल नहीं हो सकता, क्योंकि बिन बारिस के मौसम के अगर खेत मे बीज डाले जाएंगे तो वे केवल कचरा ही बनेंगे। उन बीजों से अच्छी फसल की उम्मीद नहीं रखी जा सकती। इसलिए सही समय पर सोच-समझकर किया गया कार्य ही मंजिल की तरफ लेकर जाता है।
मुश्किलों  से  भाग  जाना  आसान  होता है,  हर  पहलू  जिंदगी  का  इम्तिहान  होता  है,                        
डरने वालों को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में,  लडऩे  वालों  के  कदमों  में  जहान  होता है
यदि कड़ी मेहनत को हथियार बनाए जाए तो सफलता अवश्य ही हमारी गुलाम बनती है। हर रोज आकर हमें परेशान करने वाली मुश्किलें, नित-नई पैदा होने वाली समस्याएं, घनघोर बादल की तरह जिंदगी में भूचाल लाने वाली विपदाएं ही वो इम्तिहान है। जिसने इंसान को और अधिक संवारने का कार्य किया है। इतिहास गवाह है माजी (भूतकाल) में इंसान ने हर कदम पर इन मुसीबतों, समस्याओं और विपदाओं का हंसते हुए सामना किया है और इनका हल भी निकाला है। उसी के परिणाम के रूप में उस समय जो समस्याएं थी आज हमारे लिए विज्ञान के आविष्कार बन चुकी है। जिनके बिना आज हमें हमारी जिंदगी अधूरी लगती है।
हिम्मत करने वालों के नसीब एक न एक दिन अवश्य बदलते हैं। जिंदगी में मुसीबतों के सामने कभी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए, संघर्ष कर सफलता तक पहुंचने वाले को दुनिया हमेशा सलाम करती है। इंसान को जिंदगी में हर लम्हा संघर्ष करते रहना चाहिए। क्योंकि सोना जितना आग में तपता है, उसकी चमक उतनी ही तेज होती है। इसीलिए इंसान को लगातार प्रयास करते ही रहना चाहिए। कहा भी गया है -
तेरे गिरने में तेरी हार नहीं है, तू इंसान है कोइ अवतार नहीं है, गिर, उठ, चल, दौड़, फिर भाग, जिंदगी संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं है।
उस्मान गनी

Posts from our Students
 Analysing and Reevaluating policies for Healthcare Workers 
Large health care institutions may be the most complex in human history and small health care organizations are barely manageable. The Indian government has given an ordinance that makes violence against Healthcare workers a non bail able offence punishable by up to 7 years imprisonment Ahmed concerns that covid-19 pandemic has stayed and upsurge of such targeted violence
The ordinance which  amends  epidemic disease  act 1897 and seeks to protect doctors nurses and paramedical staff from harassment or any physical injury -signals the government's zero tolerance of violence against healthcare services.
The move amid India's rising covid-19 count follow multiple incidents of violence and harassment of doctors and Healthcare workers engaged in covid-19 care of contact tracing in demand from IMA Indian Medical Association for protective legislation.
The resident doctors in some government hospitals in Delhi who have raised concerns about shortage of personal protective equipment PPT of complaint about hostile hospital administration.
In the central Indian town of Indore Healthcare workers engage in contact tracing were attacked by a mob. On 19 April a mob in the city of Chennai attack and ambulance carrying the body of neurosurgeon who died after contacting covid-19.
If dignity is denied even in death our patience and restraint lose their value. Attribute search in violence against him care workers to a mix of ignorance and fear are amplified by pandemic. Pradeep Kumar and Orthopedic surgeon Chennai work with neurosurgeon who died told " attacks on doctors has been a long standing problem in this country “even before the pandemic.
The government has only amended epidemic act we need stick permanent and strong the first legislation. From these all examples I want to conclude that though there were many policies amended ,the health care are not feeling free and safe. And these all clearly clarified by my examples.
Vipul dave / XI Science 
मोबाइल और लॉकडाउन
अपनी बात की शुरुआत मैं एक लाइन से करूँगा कि मोबाइल हमारे अकेलेपन को दूर करने आया था परंतु इसने हमें सबसे अलग कर दिया। जब मोबाइल का आविष्कार हुआ तब यह सिर्फ बात करने के काम में आता था और अब इससे हम बहुत सारे कार्य कर सकते हैं जो कि एक अच्छी बात है। यह अब हमारे जीवन का एक अनिवार्य अंग बन गया है। इसके फायदे तो सबको पता है परंतु कोई इसके नुकसान पर बात करना पसंद नहीं करेगा। 
कोरोना महामारी से पहले तो यह सब ठीक था पर अब लॉकडाउन के कारण हर तरह की स्थिति में बदलाव आ गया है। पहले लोग जब अपनी अनिवार्य गतिविधियों से मुक्त होते तो मोबाइल लेकर बैठ जाते थे। इनमें से कुछ अपने काम से तो कुछ बिना किसी काम के बस मनोरंजन के लिए बैठ जाते थे। एक हद तक तो ठीक परंतु मनोरंजन ही चाहिए तो किताब पढ़ो। किताबें आपको बहुत तरह से फायदा पहुँचा सकती है। जितना समय हम मोबाइल पर आँखें खराब करने के लिए व्यर्थ बताते हैं अगर उसी समय में हम एक किताब पढ़ें तो आँखों को भी बचा सकते हैं और अपनी बुद्धि को भी बढ़ा सकते हैं। 
अब जैसे कोरोनावायरस आने के बाद सब लोग अपने घर पर बैठे थे और बाहर नहीं जा पा रहे थे। बड़े अपने काम पर और बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं। और बस घर पर बैठे-बैठे समय नहीं बीत रहा था। ऐसे में परिवार मिलकर बच्चों को साथ लेकर कुछ ऐसे खेल जो हम घर पर खेल सकते हैं वह खेलना चाहिए था या और भी बहुत सारी चीजें हैं जो एक परिवार घर पर कर सकता है, करना चाहिए था, परंतु नहीं। यह एक ऐसा अवसर था जिसमें परिवार जन अपना समय एक-दूसरे को दे सकते थे। माता-पिता तो स्वयं बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं और खुद भी यही कर रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हम बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं और बात बात पर गुस्सा करने लग जाते हैं। अगर हमें ऐसी बुरी लतों से बचना है तो अपने आप पर काबू रख कर और मोबाइल छोड़ अपने परिवार जनों के साथ समय बिता कर, स्वभाव के बदलाव से दूर रह सकते हैं। परिवार में लोगों का क्या महत्व है, वे क्या सोचते हैं, उनका नजरिया कैसा है यह सभी बातें उनके साथ समय बिताकर ही जान सकते हैं। 
कई लोगों ने लॉकडाउन को अपने किसी कौशल को विकसित करने के लिए किया जिससे कि समय का सदुपयोग तो हुआ ही नया भी सीखने को मिला। वही किसी ने सिर्फ मोबाइल पर या स्वयं के कार्य से मुँह मोड़ कर समय व्यतीत किया, जिसका कोई अर्थ नहीं निकलता है। 
कुछ लोग इसे समय को भगवान का श्राप तो कुछ इसे भगवान की तरफ से दी हुई छुट्टी मानते हैं जिसे हम परिवार के साथ वक्त बिताने से लेकर, अपने किसी कौशल या किसी नई तरह की चीजें सीखने में बिता सकते हैं वहीं कई लोग इसे सिर्फ मोबाइल के साथ बिस्तर में पड़े रह कर बिता दी, जो कि सरासर गलत किया। ऐसे अवसर हाथ से जाने न दें जब हमें परिवार का साथ मिल रहा हो। 
Mangilal Dewasi 
Class IX
FRIENDSHIP

Our society tends to place an emphasis on romantic relationships. We think that just finding that right person will make us happy and fulfilled. But research shows that friends are actually even more important to our psychological welfare. Friends bring more happiness into our lives than virtually anything else.
Friendships have a huge impact on your mental health and happiness. Good friends relieve stress, provide comfort and joy, and prevent loneliness and isolation. Developing close friendships can also have a powerful impact on your physical health. Lack of social connection may pose as much of a risk as smoking, drinking too much, or leading a sedentary lifestyle. Friends are even tied to longevity. One Swedish study found that, along with physical activity, maintaining a rich network of friends can add significant years to your life.
But close friendships don’t just happen. Many of us struggle to meet people and develop quality connections. Whatever your age or circumstances, though, it’s never too late to make new friends, reconnect with old ones, and greatly improve your social life, emotional health, and overall well-being.
Ramesh Dewasi/IX
Writing
Writing is a medium of human communication that represent language with signs and symbols . For language that utilize a writing system .Inscription can complement spoken language by creating a durable version of speech that can be stored for future reference or transmitted across distance. Writing, in other words, is not a language but a tool used to make language readable within a language system ,writing relies on many of the same structure as speech such as vocabulary, grammar, and semantic with the added dependency of system on a signs or symbols. The result of writing is called a tent and the interpreter or activity of this tent is called reader. 
Jatin Tripash/ X

Technology in Education
Technology is just a tool in terms of getting students working together and motivating them teacher is more important. The above are the words which were said by Bill Gates. Covid-19 has affected the education systems worldwide leading to the closures of school universities and colleges. Most of the governments have temporarily closed the educational institutions as they have thought that it opening them would be threat to the children. As of 4th September 2020 approximately 1.277 billion learners are affected because of this covid-19 situation today. In this covid-19 time instead of having books in the hand the students are having tablets and other handsets in their hands. However it is because of technology that the student’s education is not affected during covid-19 situation. Also the devices which method which were not good for students like mobiles laptops extra are now as a boon for students as because of them it is possible for students to get the education which was stop because of covid-19. Because of this covid-19 situations there is a big leap in the education error like there are many much online learning platforms which are open for students and they are also providing free access during the cold time so this is also helpful for students so so that there is no gap between the students and their future. It is not only providing new things to students but also to the teachers like teachers are getting to learn how to provide education via technology.
Rahul Vaishnav/ XI Science

Volume No. 440  Published by The Editorial Board: Mrs Bharti Rao, Mr Krishan Gopal, Ms Swabhi Parmar,
Chief Editor: Diksha Choudhary, Secretary: Uma Choudhary, Joint Secretary: Mansi Choudhary, Editors: Anumesh Rao, Krisha Dave, Puran Choudhary, Jatin Tripash, Diksha Choudhary, Tammana Solanki, Uma Choudhary, Priyanka Deora, Krithika Rajpurohit, & Kunal Rajpurohit.

Taking Learning Forward @ The Fabindia School

Back Issues of The School Weekly