The School Weekly 18th April 2022

News & Events
Friendly Cricket Match was played between the Staff and students body, both the teams made utmost efforts to win the match by showing their skills in batting and bowling.
But, the students team won the match. Vinay Pratap from the student’s team got us the win by hitting a four on the last ball .
This match created huge excitement and enthusiasm in the spectators present on the ground.
Primary section students went to the Jungle to explore and learn about wildlife.

आशा अमर धन
सच ही कहा गया है कि आशा अमर धन है।  व्यक्ति जब निराश हो जाता है तब कुछ भी करने की इच्छा नहीं रहती।  यदि इसीप्रकार निठल्ला बैठ जाएगा तो प्रगति का चक्र ही रुक जाएगा।  निराशा का भाव मन में जगते देर नहीं लगती।  ऐसे अवसर तो जैसे तैयार ही बैठे है।  जब कुछ करने की चाह हो और उसमें असफलता मिले तो निराश हो सकते है।  उचित सहयोग न मिले तो निराश हो सकते है।  अर्थात निराश होने के कई बहाने है।  
जीवन में उम्मीद होना बहुत आवश्यक है। ऐसे जीवन का कोई प्रयोजन नहीं जो निराशा से घिरा हो। आगे बढ़ने के लिए यह आवश्यक है कि मन में आशा की किरण जगाए रखें।  किसी कवि की कविता कहती है -
निराशा के दीप बुझाकर,
आशाओं के दीप जलाएँ,
दसों दिशा में फैले तम को,
मिलकर कोसों दूर भगाएँ  
हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, कठिन और सुखद दिन तो आते रहते हैं।  निराशा व्यक्ति को पतन की और ले जाती है जबकि आशा एक नई शक्ति का संचार करती है।  परोपकार करने से आशा बलवती होती है।  अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य अवश्य करें। 
आशा जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।  प्रसन्नचित मन और सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति को कभी बीमारियाँ नहीं घेरती। जीवन में लक्ष्य प्राप्ति करनी है तो आशावादी बने रहो, चाहे असफलता मिले किसी काम में, फिर भी आशा  दामन न छोड़ो।  राष्ट्रकवि  मैथिलीशरण गुप्त के शब्दों में -
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।  
कृष्ण गोपाल / Educator
मेरे सपनों का भारत 
मेरे सपनों के भारत में महिला सशक्तिकरण को मैं बढ़ावा देना चाहता हूं जहां पर महिलाएं अपने दम पर आगे बढ़ती रहें वह आत्मनिर्भर हो सके I परंतु वर्तमान के समय बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कम है और मेरे सपनों के भारत में  इसे बदलते देखना चाहता हूं I मैं चाहता हूं कि महिलाओं को आगे आना चाहिए तभी तो हमारा भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में माना जाएगा I और यह तभी संभव है जब पुरुष और महिलाएं कंधे से कंधे मिलाकर चलेंगे I हम कहते जरूर है कि बच्चे हमारे देश का भविष्य है परंतु भारत में आज भी कई से क्षेत्रों में  शिक्षा को इतना महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि वह सोचते हैं कि बच्चे पढ़ लिखकर क्या कर लेंगे अगर काम करेंगे तो रोजी-रोटी कमा पाएंगे I परंतु मैं इस विचार में बिल्कुल सहमत नहीं हूं मैं अपने सपनों के भारत में आशा करता हूं कि शिक्षा का प्रीतिकोप भारी रहे तथा सभी को शिक्षित होने का अवसर मिले I और इसके साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए ताकि हमारा भारत स्वास्थ्य शिक्षित हो सके I किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं हो, अपराध दर बिल्कुल शून्य हो जाए ताकि देश की दिशा बदल सके I मेरे सपनों के भारत में चोर, अपराधी, खूनी ,बलात्कारियों आदि के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं है I मैं चाहता हूं कि अपराध दर में गिरावट हो व चारों तरफ शांति का वातावरण होना चाहिए I तकनीकी विकास के क्षेत्र में मैं अपने सपनों के भारत को आत्मनिर्भर देखना चाहता हूं हमारे देश में कहीं महापुरुष है जिनकी सहायता से हम विकास कर सकते हैं I हमें किसी पर निर्भर होने की आवश्यकता ना पड़े ऐसा विचार करता हूं I तकनीकी विकास पर बात चल ही रही है तो हमारे भाई किसान  क्यों पीछे रहेंगे I उन्हें सभी टेक्नोलॉजी का ज्ञान  मिलने का अवसर देना चाहिए  I उन्हें कोई जरूरत नहीं है कि वे  सरकार पर रोजगार के लिए निर्भर रहे I आखिर में एक विषय की चर्चा और मैं करना चाहूंगा कि हम अक्सर चलते फिरते रास्तों पर गंदा कचरा फेंक देते हैं, अगर हम इसी प्रकार पूरे देश में कचरा फैलाते रहे तो एक दिन हमारे  देश से खुशबू का पता किताब से फट जाएगा और हमारा देश बदसूरत व बदबूदार बन जाएगा I मेरे सपनों के भारत में मैं यही आशा करता हूं या मैं स्वयं पूरा प्रयास करूंगा कि मेरा देश किसी भी क्षेत्र में पीछे तथा निर्भर ना रहे I मेरा देश सदा स्वच्छ एवं सुंदर रहे ,खूब तरक्की करें, एक दूसरे को प्यार बांटे, खुशी से मिलजुल कर रहे I 
धन्यवाद
धवन चौधरी / दसवीं
मीठी वाणी
जिह्वा सभी को मिलती है किन्तु बोलना सिर्फ मनुष्य के लिए संभव है। मनुष्य की सफलता में जहॉं अनेक बातों का महत्व है वहॉं मधुर भाषण, मीठी बोली का भी स्थान है। अपने मधुर व्यवहार तथा मीठी बोली से हम दूसरों के हृदय को आसानी से जीत सकते हैं। उनसे अपनी इच्छा अनुसार काम करवा सकते हैं। मधुरता के कारण ही कोयल को सबसे प्यार मिलता है। मीठा बोलने से मन को शांति मिलती है, सुनने वाले का मन भी प्रसन्न हो जाता है। मीठी बोली बोलने के साथ अप्रिय तथा असत्य वचन नहीं बोलने चाहिए। बोली से मनुष्य के व्यक्तित्व की भी पहचान होती है। मीठी वाणी बोलने वालों के स्वागत के लिए संसार में चारों तरफ अमीर-गरीब, अपरिचित-परिचित सबके द्वार खुले रहते हैं। इसलिए हमें हमेशा मीठी वाणी बोलनी चाहिए। कबीर दास कहते हैं-
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।
यक्षिता राठौड़ / VII
OVERCOMING DIFFICULTIES WITH MIRACLES 
Yes, I had been in great difficulty. In the ninth grade I was troubled with a few science problems. The next morning was the exam paper and I couldn't understand a few concepts and problems related to that. I asked my friends to help me out but they themselves were preparing for the exam so they couldn't help me. I was in tension; for I knew if I couldn't score in this paper, my combined marks for all subjects would come down. During the night, one of my father's friends visited us  and my father told him that I was encountering problems in the subject and requested him to solve my queries. Surprisingly, he was a professor in the college who taught Science. I was overjoyed with this revelation. He answered my doubts patiently and helped me solve the problems. The next day I took the exam and it went very well. I think this was nothing less than a miracle and God came to my rescue in such a difficult time.
Himanshi Rajpurohit / X
The Supernatural Power Of God
Yes, I believe that there is a supernatural power God in this world. Whenever we are in any difficult situation, we always pray to God to save us. It has happened with me many times whenever I have been in any difficult situation, I have always prayed to God to save me. One incident I remember was when I went with my family to Shimla for the winter vacation trip. We all were enjoying it very much. Weather was very pleasant. All the mountains were like white carpet of snow. Everything was going fabulously. But when we reached Kufri, it was an adventure camp. We decided to do horse riding. I got the slowest horse. Everyone had gone far and I was left behind. My horse took a wrong turn. The horse master was also not there. It was a very narrow way and there were ditches all around. I was scared, my horse was walking at the edge of the lane and there was a ditch below. That was a difficult situation for me. I prayed to God to save me. My horse lost its balance and I fell into that ditch. I closed my eyes, I was taking god's name. I felt that I would die now, but it was a miracle that when I fell I grabbed the branch of a tree and stood straight on the ground. It was a deep ditch, a lot of big stones were there, but I wasn’t injured. It was like a miracle, as where I fell only sand was there. And I was saved. It was like God had saved me that day.
Ritu Parihar/ X


Volume No. 512 Published by The Editorial Board: Mr Jitendra Suthar, Ms Jyoti Sain, Mr Arvind Singh, Jatin Tripash, Pushpendra Singh Ranawat, Yashwant Singh Sonigra, Tamanna Solanki, Kritika Rajpurohit, Kanak Gehlot, Kunal Rajpurohit, Harshit Rajpurohit, Ronak Deora, Mohammad Anas.

The School Weekly

Story of The Fabindia School by Bharti Rao